हमारे लेख
विरहगीतिः
रचयिता - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) कृष्ण कृष्ण त्वमानन्दसिन्धुः स्वयंचास्मदीया प्रभा नेत्रयोर्नन्दज।त्वं कदा श्लेक्ष्यसे कातरान्नः प्रभोदह्यमानाः प्रियास्त्वामतः शान्तिद॥१॥ हे कृष्ण! हे नन्दनन्दन! आप तो...
सूर्य नारायण की आरती (भुवनभास्कर की आरती)
रचयिता - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) गाओ गाओ रे भुवनभास्कर की आरती गाओ॥ श्रीकमलाकृत नयन मनोहर,स्वर्णिम मुकुट टंक मणि सुन्दर।अलक पुलक सब वैभव को धर,तिलक सकल अघ ओघ नाश कर।अरुणोदय इव शुभ्र दीपवर सब मिल आज जलाओ।गाओ गाओ… कानों में...
देवराज इन्द्र की आरती
रचयिता - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) हरिहयरूप हरे (जय) हरिहयरूप हरे।श्रुतियों में प्रथमार्चित, कर में वज्र धरे। जय हरिहय…हे काश्यप हे सुरपति, हे पर्जन्य करे।हे वृत्रारि अवनि के, दानव नित्य डरे। जय हरिहय…हे मेघालय के पति,...
श्री वराह भगवान (वराह अवतार भजन Lyrics)
रचयिता - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) सिद्ध संत जिनको जपें प्रकटे श्री सुखधाम।भक्तों के दुःख मेटने वे वराह भगवान॥ ^ विष्णु के अवतार मेरे, श्री वराह भगवान^ विष्णु के अवतार जिनके, चार भुजा अभिराम धरती का भार उठाते हैं, श्री वराह...
क्या हिन्दू बौद्ध मूर्तियों को पूजते हैं?
लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) शुरू करने से पहले, यह लेख किसी भी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुचाने हेतु नहीं लिखी गई है बल्कि कुछ लोगों के उन वाक्यों का प्रत्युत्तर है जिसमें कि वे हिन्दुओं को लक्ष्य...
विश्व की सबसे प्राचीन भाषा
लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) लोगों के मन में यह प्रश्न तब से है जब से वे भाषा का अध्ययन कर रहे हैं। जनमानस में संस्कृत ही सबसे प्राचीन भाषा है किन्तु भ्रामक आर्य प्रवास प्रभृति व्याख्याओं के बाद से...













