

रचयिता – आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी
(कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि)
सिद्ध संत जिनको जपें प्रकटे श्री सुखधाम।
भक्तों के दुःख मेटने वे वराह भगवान॥
^ विष्णु के अवतार मेरे, श्री वराह भगवान
^ विष्णु के अवतार जिनके, चार भुजा अभिराम
धरती का भार उठाते हैं, श्री वराह भगवान
दुष्टों से नित्य बचाते हैं, श्री वराह भगवान
^ मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, गल बैजन्ती माल
^ मस्तक में मणि मौर विराजे, ऊर्ध्व पुण्ड्र लिये भाल
भक्तों पर प्रेम लुटाते हैं, श्री वराह भगवान
धरती का भार उठाते हैं, श्री वराह भगवान
^ रद में रत्नह्रदा इठलाती, उर में श्री का साथ
^ शंख सुदर्शन सारस कर में, गदा भीतिकर हाथ
सुर नर मुनि चँवर डुलाते हैं, श्री वराह भगवान
धरती का भार उठाते हैं, श्री वराह भगवान
^ लोकार्णव में ध्यानमग्न छवि, जिसका निर्मल नीर
^ चरणकमल कमला सेवित नित, ध्यान धरैं मति धीर
नारद भी नित नित गाते हैं, श्री वराह भगवान
धरती का भार उठाते हैं, श्री वराह भगवान
भजन की जानकारी – इस भजन का मूल गीत राजस्थानी बोली में श्री ललित नामा जी के द्वारा रचित है जिसको सुर ताल स्टूडियो नैनवा द्वारा संगीत दिया गया है एवं उनके यूट्यूब चैनल द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस भजन को श्रीमद्भागवत कथा आदि में श्रीवराह अवतार प्रसंग में गाने योग्य हिन्दी भजन में रूपान्तरित करने के आग्रह के कारण आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी के द्वारा इसे रूपान्तरित किया गया है जो कि हिन्दी भाषा में आप सबने पढ़ा। चूँकि यह भजन राजस्थानी मूल में श्रीवराह मंदिर हेतु समर्पित था एवं इसे कथा प्रसंग हेतु संपादित करना था, अतः नई अंतराएं भी जोड़ीं गईं हैं जो आचार्यश्री जी द्वारा ही रचित हैं। यदि आपको इस भजन के संगीत को सुनना है तो यहाँ क्लिक करें।







