हमारे लेख

करवा चौथ व्रत की शास्त्रीय विधि

करवा चौथ व्रत की शास्त्रीय विधि

   लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) करक चतुर्थी या करवा चौथ के नाम से यह बड़ा ही प्रचलित व्रत है जो वर्ष से चतुर्थीव्रतों में से एक है। इस दिन सौभाग्य की अक्षरता हेतु स्त्री भगवान् गणपति की पूजा करती है।...

पौराणिक सात द्वीपों की वर्तमान स्थिति

पौराणिक सात द्वीपों की वर्तमान स्थिति

   लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) वर्तमान समय में हम जिस पृथ्वी पर निवास करते हैं, प्रश्न यही है कि हम उसके विषय में कितना जानते हैं। सम्भवतः इसके विषय में हमें एक प्रतिशत का भी ज्ञान नहीं। हमें यह ज्ञान...

कालिकालास्यम्

कालिकालास्यम्

   प्रणेता - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) असितवपुरिवाञ्जनां प्रमीता--जिरचरणामथरिप्रभाविदीप्ताम्।क्षणनुजशिरभित्तिशुक्तितृप्तांवसनविरागतनुं प्रणौमि नर्याम्॥१॥ कज्जल के समान काले शरीर वाली, मृत देह पर चरण रखी हुई...

नवरात्र के कुमारी पूजन हेतु ध्यातव्य बातें, कन्याओं के लक्षण

नवरात्र के कुमारी पूजन हेतु ध्यातव्य बातें, कन्याओं के लक्षण

   लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) जिस प्रकार सिंह शावक की माता अपने पुत्र के ऊपर भय जानकर तत्क्षण उसके निकट आ जाती है, तथा एव भगवती इन वज्रदंष्ट्रा कही जाने वाली वसंत तथा शरद ऋतुओं में अपने पुत्रों की...

वेदों तथा पुराणों में कबीरदास जी के नाम का स्पष्टीकरण तथा अनिरुद्धाचार्य जी से सम्बद्ध राधावन्तः विवाद का व्याकरणपरक विश्लेषण

वेदों तथा पुराणों में कबीरदास जी के नाम का स्पष्टीकरण तथा अनिरुद्धाचार्य जी से सम्बद्ध राधावन्तः विवाद का व्याकरणपरक विश्लेषण

   लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) व्याकरण भाषा का मेरुदण्ड है, ऐसा कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। कोई भी ग्रंथ किसी भाषा में लिखी होती है तो वह व्याकरण के सूत्रों से बंधी होती है। हमारे धर्मशास्त्र, इतिहास,...

क्या मूर्तिविसर्जन अशास्त्रीय है?

क्या मूर्तिविसर्जन अशास्त्रीय है?

   लेखक - आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) हम नवदिवस तक नवरात्र में श्रीदुर्गाजी की पूजा करते हैं। वस्तुतः यह नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है। नव दिवस तक हम नित्य नव देवियों की विधिवत् पूजा किया...