Anand Ramayan

मुख्यपृष्ठ लेखकमहर्षि वाल्मीकिप्रकाशकप्रारूप*pdfआकार293.7MBभाषासंस्कृत, हिन्दीफाइल संख्या1 विवरण – भगवान् श्री रामचंद्र के सुन्दर चरित्रों के आयोजनरूप इस ग्रंथ में अधिकांश कथाएं वाल्मीकीय रामायण से ली गईं हैं। इतिहासकार इसके लेखक को अज्ञात कहते हैं किंतु...
संन्यासियों तथा वानप्रस्थियों के पुनर्गृहस्थ होने तथा उनकी संततियों के विषय में शास्त्रपक्ष

संन्यासियों तथा वानप्रस्थियों के पुनर्गृहस्थ होने तथा उनकी संततियों के विषय में शास्त्रपक्ष

   लेखक – आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) प्रश्न: क्या संन्यासी या वानप्रस्थी पुनः गृहस्थ बन सकता है तथा पुत्र आदि उत्पन्न कर सकता है? चूँकि संन्यास में ब्राह्मण को ही अधिकार (“ब्राह्मणाः...
हनुमान् जी की वानर प्रजाति

हनुमान् जी की वानर प्रजाति

   लेखक – आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) कुछ लोगों का यह वक्तव्य होता है कि हनूमान् वानर तो थे, किन्तु वानर इत्युक्ति आदिवासियों के लिये ही प्रयुक्त होती है। कुछ जन कहते हैं कि हनूमान् की तो पूँछ भी नहीं...
प्राचीन भारतीय सभ्यता : वेदों की प्राचीनता

प्राचीन भारतीय सभ्यता : वेदों की प्राचीनता

   लेखक – आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) वेद सनातन धर्म के चार स्तंभ हैं। वेद वे वृक्ष हैं जिनसे वेदान्त, पुराण आदि शाखाएं उद्भूत होतीं हैं। समस्त शास्त्रों का मूल वेद ही है। वेदों से ही समस्त ज्ञान का...
प्राचीन भारतीय सभ्यता : आर्य प्रवास एक झूठ

प्राचीन भारतीय सभ्यता : आर्य प्रवास एक झूठ

   लेखक – आचार्यश्री कौशलेन्द्रकृष्ण जी   (कथावक्ता, श्लोककार, ग्रंथकार, कवि) हमारी भारत भूमि विविधताओं का देश है। संस्कृति से लेकर रूप, रंग में भी विविधता है। आदिकाल से इस भूमि को देवभूमि कहा जाता है। देवता भी जहाँ जन्म लेने के इच्छुक हों,...